मिशन-2027 पर भाजपा का फोकस तेज, कमजोर और कांटे की सीटों के लिए बनेगी नई रणनीति
BJP intensifies focus on Mission 2027
लखनऊ। BJP intensifies focus on Mission 2027, मिशन-2027 को लेकर भाजपा कई रणनीतियों को एक साथ चुनावी धार देने में जुटी है। हारी और दस हजार से कम वोटों से जीती विधान सभा सीटों पर ऐसे प्रभारियों की नियुक्ति की जाएगी, जिनके पास कांटे की टक्कर वाली सीटों पर चुनाव लड़ने या लड़ाने का अनुभव होगा।
पार्टी ऐसी सीटों एवं विधान सभा प्रभारियों की सूची बनानी शुरू कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने पदाधिकारियों को होमवर्क दे दिया है।
भाजपा ने मिशन-2027 के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। 25 जून को प्रदेश पदाधिकारियों एवं छह मोर्चों एवं छह क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा की गई। चार और पांच जुलाई को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संगठन के पदाधिकारियों समेत कई अन्य बुजुर्ग नेताओं से मिलकर चुनावी वातावरण को और मजबूत करने का प्रयास किया।
प्रदेश अध्यक्ष ने 2017 एवं 2022 विधान सभा चुनावों का विश्लेषण कराया, जिसके बाद 2024 लोकसभा में विधान सभा वार पार्टी के प्रदर्शन का भी आंकड़ा निकाला गया। 18 जिलों में सपा ने भाजपा को हराया है जहां अब पार्टी केंद्रीय मंत्रियों एवं संगठन के दिग्गजों को क्लस्टर वाइज प्रभारी बना सकती है। जिन सीटों पर भाजपा कभी नहीं जीती या एकाध बार ही विजयी रही, वहां भी कड़ी सीटों पर चुनाव लड़ने वाले अनुभवी चेहरों को प्रभारी बनाने की चर्चा है।
वर्ष 2017 के मुकाबले 2022 के चुनाव में भाजपा 57 सीटें हार गई, जबकि सपा ने 64 सीटें ज्यादा जीत ली। अगर लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को मानें तो सपा ने भाजपा दो दर्जन से ज्यादा विधानसभाओं में बढ़त बनाई है।
अब अपना दल-एस, रालोद, सुभासपा और निषाद पार्टी साथ होने के बावजूद भाजपा अपने सामाजिक समीकरणों को ढीला नहीं छोड़ेगी, वहीं हारी सीटों पर भी पार्टी नई रणनीति के साथ उतरेगी। भाजपा ने निजी एजेंसियों से दो बार सर्वे करा लिया है।
अब विधान सभा प्रभारियों से भी सीटों एवं वहां मजबूत दावेदारों की जानकारी जुटाई जाएगी। उनसे पूछा जाएगा कि संबंधित सीट पर विपक्षी दल की क्या ताकत है और इसकी वजह क्या है। पीडीए फैक्टर कितना असरकारक होगा, वहीं आने वाले दिनों में विपक्ष किस नैरेटिव को गढ़ने में जुटा है।
जिन सीटों पर पार्टी 2022 विधान सभा चुनाव में दस हजार से कम वोटों के अंतर से जीती है, उस पर भी टिकट बदले जा सकते हैं। यहां पर अनुभवी चेहरों को जिम्मेदारी दी जाएगी। वो नियमित प्रवास, जनसंपर्क, युवा संवाद, किसान चौपाल एवं पिछड़ा एवं दलित सम्मेलन पर जोर देंगे।